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रात में पैरों में ऐंठन (Nocturnal Leg Cramps)

रात में सोते समय अचानक पिंडलियों या पैरों की मांसपेशियों में तेज़ खिंचाव या ऐंठन महसूस होना बहुत सामान्य शिकायत है। कई बार यह दर्द इतना तीव्र होता है कि नींद खुल जाती है और कुछ मिनटों तक पैर हिलाना मुश्किल हो जाता है। इसे चिकित्सकीय भाषा में Nocturnal Leg Cramps कहा जाता है।

यह समस्या किन लोगों में अधिक होती है

रात के समय पैरों में ऐंठन किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन यह विशेष रूप से निम्न समूहों में अधिक देखी जाती है—

  • 40 वर्ष से ऊपर के लोगों में
  • गर्भवती महिलाओं में
  • डायबिटीज़, थायरॉइड या किडनी की बीमारी वाले रोगियों में
  • जो लोग दिनभर खड़े रहकर काम करते हैं (जैसे दुकानदार, शिक्षक, नर्स आदि)
  • अत्यधिक व्यायाम करने वाले या लंबी दूरी तक चलने/दौड़ने वाले लोगों में

मुख्य कारण

पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन कई कारणों से हो सकती है—

  1. मांसपेशियों की थकान – दिनभर खड़े रहने या लंबे समय तक चलने से मांसपेशियाँ थक जाती हैं।
  2. पानी या इलेक्ट्रोलाइट की कमी – शरीर में सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम या कैल्शियम की कमी से मांसपेशियों में संकुचन होता है।
  3. दवाओं के दुष्प्रभाव – कुछ दवाएँ जैसे ब्लडप्रेशर और हार्ट की बीमारियों में प्रयोग होने वाली Diuretics (पेशाब बढ़ाने वाली दवाएँ), कोलेस्ट्रोल कम करने वाली  Statins, कुछ ब्लड प्रेशर की दवाएँ (जैसे Beta blockers) और साँस की दवाएँ (Broncho dilators) इस परेशानी को बढ़ा सकती हैं।
  4. खराब रक्तसंचार – पैरों में खून का दौरान कम होने से मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती जिससे मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है।
  5. गर्भावस्था – गर्भावस्था में बढ़ते वजन और हार्मोनल बदलाव के कारण यह समस्या आम होती है।
  6. अन्य रोग – डायबेटिक न्यूरोपैथी, हाइपोथायरॉइडिज़्म या किडनी रोगों में भी ऐंठन हो सकती है।

तुरंत क्या करें जब ऐंठन हो

  • पैर को धीरे-धीरे सीधा करके खींचें
  • पैर की उंगलियों को ऊपर की ओर मोड़ें (अपने सिर की दिशा में)।
  • हल्के हाथों से मालिश करें
  • खड़े होकर धीरे-धीरे पैर पर वजन डालें या चलने की कोशिश करें, इससे मांसपेशी ढीली होती है।

रोकथाम के सरल उपाय

  1. सोने से पहले स्ट्रेचिंग करें – खासकर पिंडलियों की हल्की खिंचाव-वाली कसरत करें।
  2. पर्याप्त पानी पिएँ
  3. संतुलित आहार – आहार में ताजे फल, दही, दूध, हरी सब्जियाँ आदि शामिल करें।
  4. मैग्नीशियम या कैल्शियम सप्लीमेंट – डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
  5. लंबे समय तक खड़े या बैठे न रहें – हर 1–2 घंटे में थोड़ी चहल कदमी करें।
  6. आरामदायक फुटवियर पहनें – बहुत ऊँची हील या सख्त सोल वाले जूते चप्पलें न पहनें।

कब डॉक्टर से मिलें

यदि—

  • ऐंठन बार-बार और रोज़ होती है,
  • साथ में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होती है,
  • या किसी दवा के शुरू होने के बाद यह समस्या बढ़ी है,

थोड़ी सावधानी, नियमित स्ट्रेचिंग और संतुलित आहार से इस परेशानी से राहत पाई जा सकती है। यदि किसी दवा के कारण से यह परेशानी आरम्भ हुई है तो उस के स्थान पर दूसरी दवा ली जा सकती है।

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