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पैरों में सूजन ( swelling in feet )

बहुत से लोगों को पैरों में सूजन आने की शिकायत होती है. इनमें से कुछ लोगों को बाकी शरीर पर (विशेषकर चेहरे पर) सूजन आने की शिकायत भी होती है. कुछ लोगों को दिन में चलने फिरने या बैठे रहने के बाद शाम को पैरों में सूजन हो जाती है जो कि रात को सोने के बाद सुबह तक कम हो जाती है. कुछ लोगों को सुबह उठने पर चेहरे पर सूजन होती है (विशेषकर आंखों के नीचे). यह सूजन शाम तक कम हो जाती है. सूजन वाले हिस्से पर उंगली से दबाने पर कुछ लोगों की खाल में गड्ढे पड़ जाते हैं. बहुत से लोगों को सूजन अपने आप बढ़ती है और अपने आप कम होती है. सूजन बढ़ने के समय पेशाब आना कम हो जाती है.

सूजन आने के वैसे तो बहुत से कारण होते हैं पर उनमें से कुछ मुख्य कारण निम्न है –

  1. अधिकतर लोगों को बिना किसी विशेष कारण के थोड़ी सी सूजन आती है जोकि विशेषकर पैरों में होती है एवं केवल शाम के वक्त होती है. दबाने पर खाल में हल्का सा गड्ढा पड़ता है. यह अधिकतर उन लोगों में होती है जिनका दिन में खड़े रहने का यह कुर्सी पर बैठने का काम होता है. ऐसे लोगों में जांचों में कुछ विशेष खराबी नहीं आती. खड़े रहने या बैठे रहने पर रक्त शिराओं (veins) में हाइड्रो स्टेटिक प्रेशर द्वारा कुछ पानी कैपिलरीज़ (capillaries) से लीक होने के कारण इस प्रकार की  सूजन आती है. इनमें से बहुत से लोगों को थोड़ी खून की कमी एवं प्रोटीन की कमी होती है. इस प्रकार की सूजन के मरीजों को भोजन में नमक कम लेना चाहिए, अत्यधिक पानी नहीं पीना चाहिए एवं जहां तक हो सके पैरों को ऊंचा करके बैठना चाहिए. रात को लेटते समय पैरों के नीचे तकिया लगा लेना चाहिए. भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी चाहिए और यदि खून की कमी हो तो उसकी जांच कराकर आयरन और विटामिन इत्यादि लेना चाहिए. इस प्रकार की सूजन अपने आप घटती बढती रहती है व इससे कोई नुकसान नहीं होता इसलिए इससे परेशान नहीं होना चाहिए. कभी बहुत अधिक सूजन होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर बहुत हल्की मात्रा में सूजन की दवा ले सकते हैं.
  2. जिन लोगों का हृदय ठीक से रक्त को पंप नहीं कर रहा होता है (मेडिकल भाषा में इसे हर्ट फेल्योर कहते हैं) उन्हें भी सूजन की शिकायत होती है. इस प्रकार के लोगों को आमतौर पर सांस फूलने की भी शिकायत होती है. लेटने पर और चलने पर सांस अधिक फूलती है. कुछ लोगों को एनजाइना और धड़कन की शिकायत भी होती है. योग्य चिकित्सकों द्वारा देखे जाने एवं इसीजी व इकोकार्डियोग्राफी द्वारा  इसको डायग्नोस किया जा सकता है. ह्रदय की बीमारी का उपचार करने से यह सूजन कम हो जाती है.
  3. गुर्दे की बहुत सी बीमारियों में भी सूजन की शिकायत होती है. यह सूजन सारे शरीर पर हो सकती है पर अधिकतर पैरों और चेहरे पर होती है (विशेषकर आंखों के नीचे). गुर्दे के मरीजों को अक्सर ब्लड प्रेशर बढ़ने, खून की कमी, प्रोटीन की कमी एवं ह्रदय रोग की शिकायत आदि भी होती हैं. यह सब कमियां भी सूजन को और बढ़ाती हैं. खून की जांच, पेशाब की जांच व अल्ट्रासाउंड द्वारा गुर्दे की बीमारी की डायग्नोसिस की जा सकती है.
  4.  लिवर की बीमारी से भी सूजन की शिकायत हो सकती है. आमतौर पर होने वाली वायरल हेपेटाइटिस ‘A’ और ‘E’ दो से आठ हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाती हैं इसलिए इन में सूजन नहीं होती. लंबी चलने वाली हेपेटाइटिस ‘B’ एवं ‘C’ या अल्कोहलिक हेपेटाइटिस आदि मे पैरों में सूजन  व पेट में पानी की शिकायत हो सकती है. लिवर में सिरोसिस हो जाने पर सूजन और बढ़ जाती है. लिवर के मरीजों में भी खून की कमी व प्रोटीन की अत्यधिक कमी पाई जाती हैं जोकि सूजन को और बढाती हैं. खून की जांच एवं अल्ट्रासाउंड आदि से  लिवर की बीमारी को  डायग्नोस किया जा सकता है.
  5. जिन लोगों को सांस की पुरानी बीमारी होती है (क्रोनिक ब्रोंकाइटिस आदि) उनको भी फेफड़ों एवं हृदय की कमजोरी के कारण पैरों में सूजन आ सकती है. सीने का एक्सरे ईसीजी एवं इकोकार्डियोग्राफी द्वारा इसकी डायग्नोसिस की जा सकती है.
  6. थायराइड की कमी (हाइपोथायराइड) के मरीजों में भी शरीर में सूजन पाई जा सकती है. आमतौर पर यह सूजन सारे शरीर में होती है. इसमें दबाने पर गड्ढा नहीं पड़ता. थायराइड के अन्य लक्षण एवं खून की जांच द्वारा इसको डायग्नोस कर सकते हैं.
  7. ब्लड प्रेशर की कुछ दवाओं से (विशेषकर एमलोडेपिन ग्रुप की दवाओं) से कुछ लोगों को पैरों में सूजन की शिकायत होती है इन दवाओं को बंद करने से सूजन ठीक हो जाती है. डायबिटीज की दवा Pioglitazone से भी कुछ लोगों को पैरों में सूजन होती है जो की दवा बंद करने से ठीक हो जाती है.

पैरों में सूजन अपने आप में कोई बीमारी ना होकर बहुत सी बीमारियों का एक लक्षण है. इसको योग्य चिकित्सकों को दिखाकर विधिवत डायग्नोस करके इसका इलाज करवाना चाहिए. कुछ डॉक्टर बिना ठीक से डायग्नोस किए पेशाब अधिक आने की दवा दे देते हैं. बहुत से मरीज लंबे समय तक इन दवाओं को खाते रहते हैं. इससे नुकसान यह होता है कि उनके गुर्दे  इन दवाओं के आदी हो जाते हैं अर्थात जब तक पर दवा खाते हैं उनको पेशाब होती रहती है व  सूजन कम रहती है. जिस दिन वे दवा ना खाएं उनको पेशाब नहीं होती और सूजन आ जाती है.

 

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