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पित्ती उछलना ( Urticaria , Hives )

 

पित्ती उछलना  ( Urticaria , Hives )

पित्ती उछलना एक विशेष प्रकार की एलर्जी है जिसमें सारे शरीर की खाल में कही भी लाल रंग के उभरे हुए चकत्ते बन जाते हैं। इन चकत्तों में खुजली आती है व इन में से आग निकलती महसूस होती है। सिर की खाल में भी पित्ती उछल सकती है।

अधिकतर मरीजों में खाने की चीजों से ऐलर्जी होने से पित्ती उछलती है। आम तौर पर यह पता लगाना बहुत कठिन होता है कि ऐलर्जी किस चीज से हो रही है क्योकि बाजार में बिकने वाली खाने की चीजों में बहुत से केमिकल्स, कीट नाशक, कृत्रिम रंग, प्रेज़रवेटिव, स्वीटनर आदि प्रयोग होते हैं। खाद्य तेलों, दूध तथा मसालों में मिलावट होने की भी काफी सम्भावना होती है। यदि किसी को अंडे से ऐलर्जी है तो केक या पेस्ट्री से, टमाटर से ऐलर्जी है तो सॉस से, मूंगफली से एलर्जी है तो ग्राउंडनट रिफाइंड आइल से ऐलर्जी हो सकती है। यदि किसी गाय या भैंस को पेनिसिलिन दी गयी है तो उसका दूध पीने से पेनिसिलिनसे एलर्जिक मरीज को ऐलर्जी हो सकती है।

सामान्य खाद्य में पदार्थो में दूध, अंडा, पनीर, चिकेन, मछली व अन्य सी फूड्स, दाल, चना, मटर, मूंगफली, टमाटर, ताजे
फल, चाकलेट, जूस, कोल्ड ड्रिंक व शराब आदि से ऐलर्जी हो सकती है।

सांस के द्वारा भीतर पहुँचने वाली चीजों में परफ्यूम्स, डिओडोरेंट, कीट नाशक स्प्रे, गुड नाईट, सभी प्रकार के धुंए, पराग कण, जानवरों एवं पक्षियों के रुएँ, फफूंद आदि से भी एलर्जी हो सकती है। इन चीजों से एलर्जी होने पर पित्ती की सम्भावना कम व सांस के रोग की सम्भावना अधिक होती है।

कुछ दवाओं से भी पित्ती उछल सकती है इनमें एस्पिरिन व अन्य दर्द निवारक दवाएं, एंटीबायोटिक दवाएं व ब्लड प्रेशर की दवाएं मुख्य हैं।

अधिक गर्मी,
अधिक ठण्ड, तापमान में अचानक बदलाव, खाल पर स्क्रेच या देर तक दवाब पड़ने पर भी पित्ती उछल सकती है।

बहुत से इन्फेक्शन्स जैसे पेट के कीड़े, मलेरिया, अमीबियासिस, वाइरल व बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स से भी पित्ती उछल सकती है.

ऊपर लिखे कारणों से यह समझा जा सकता है की किसी एक मरीज में पित्ती उछलने का कारण मालूम पड़ पाना बहुत कठिन होता है। एलर्जी टेस्ट से इसमें विशेष सहायता नहीं मिल पाती है। जिन खाद्य पदार्थो से एलर्जी संभव है यदि उन्हें कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाये और फिर एक एक कर के खा कर देखा जाये तो कभी कभी एलर्जी करने वाला खाद्य पदार्थ पकड़ में आ सकता है।

पित्ती के इलाज़ में एंटी एलर्जिक दवाएँ प्रयोग की जाती हैं। स्टीरॉइड दवाओं जैसे बेटनिसोल, डेकाड्रोन आदि का प्रयोग इसमे नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा कोई कारण समझ में आता है जिससे एलर्जी हो रही हो तो उसका निवारण करना आवश्यक है। कभी कभी एलर्जी की दवा बहुत लम्बे समय तक खानी पड़ सकती है।

पित्ती के समान “एन्जियोएडिमा” नाम की एक अन्य प्रकार की एलर्जी भी खाल एवं मुह व गले को प्रभावित कर सकती है। इससे प्रभावित हिस्से पर काफी सूजन आ जाती है और उसमें हलकी खुजली व दुखन हो सकती है। यदि यह सूजन गले के भीतर हो जाये तो उससे सांस रुकने का खतरा भी हो सकता है। पित्ती व एन्जियोएडिमा के कुछ मरीजो को पेट में दर्द व उलटी या दस्त की शिकायत भी हो सकती है।

जिन लोगों को ठन्डे पानी की एलर्जी से पित्ती या एन्जियोडिमा होता है उन्हें ठन्डे पानी के पूल या नदी में नहाने के लिए नहीं
उतरना चाहिए। अचानक सारे शरीर में पित्ती उछलने या एन्जियोएडिमा होने से उनका ब्लड प्रेशर बहुत डाउन हो सकता है व गला बंद हो सकता है। पानी के अन्दर होने पर ये दोनों परिस्थितियाँ जानलेवा सिद्ध हो सकती हैं।

                                          एन्जियोडिमा

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