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नाप एवं कौड़ी ( Naap & Kaudi )

एओर्टा की धड़कन को लोग नाप समझते हैं.
प्रश्न : नाप क्या होती है? इसके हटने से क्या नुकसान होते हैं?
उत्तर : पुराने समय में जब चिकित्सा विज्ञान का विकास नहीं हुआ था तो लोगों के मन में भाँति भाँति की भ्रांतियाँ हुआ करती थीं. उन्हीं में से नाप भी एक है. वास्तविकता यह है कि ह्रदय से निकलने वाली प्रमुख धमनी (एओर्टा, aorta) पेट में से होकर पैरों को जाती है. इसके द्वारा पेट के सभी अंगों (organs) शरीर के निचले हिस्से व पैरों में रक्त पहुंचाता है. दुबले पतले लोगों में यदि नाभि के पास पेट को दबाया जाय तो इस धमनी की धड़कन को महसूस किया जा सकता है. इसको पुराने लोग नाभि का स्पंदन (plusation) समझते थे. नाभि से बिगड़ कर फिर यह नाप कहलाने लगी. लोग यह समझते थे कि नाप भोजन का पाचन करती है व इसके अपने स्थान से हट जाने पर पाचन शक्ति कम हो जाती है. यही भ्रम अब भी बहुत से लोगों को है. बहुत से लोग यह भी मानते हैं कि कुछ विशेष तरीकों से नाप को मलने से यह फिर से अपने स्थान पर आ जाती है.
प्रश्न : नाप मलने से कुछ लोगों को लाभ क्यों होता है?
उत्तर : पेट की बीमारियाँ अपने आप घटती बढती रहती हैं. ऐसे बहुत से कारण हैं जिनके कारण पेट के रोगियों को कभी दस्त कभी कब्ज हो सकते हैं. जैसे खान पान में बदलाव, हलके फुल्के इन्फैक्शन, दिमागी तनाव, मिल्क इनटॉलेरेंस इत्यादि. यदि सौ लोग नाप मलवाते हैं तो उनमे से तीस लोगों को अपने आप ही कुछ लाभ होता है. वे लोग यह समझते हैं की उनको नाप मलवाने से लाभ हुआ है. इस प्रकार यह अन्धविश्वास समाज में चलते रहते हैं.
प्रश्न : कौड़ी क्या होती है? इसका हमारे शरीर में क्या महत्व है?
उत्तर : हमारे सीने की हड्डी (sternum) के नीचे एक कार्टिलेज जुडी होती है जिसे जिफिस्टनर्म कहते हैं. बचपन में यह बहुत मुलायम होती है इसलिए मालूम नहीं होती. आयु बढ़ने के साथ साथ इसमें कैल्शियम जमा होता जाता है जिससे यह सख्त होती जाती है और महसूस होने लगती है. इसी को लोग कौड़ी समझते हैं. यह एक प्राकृतिक संरचना है व इससे कोई नुकसान नहीं होता.
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