Digestion, Pain

पेट का दर्द ( pain in abdomen )

पेट का दर्द सबसे कॉमन बीमारियों में से एक है. जब हम पेट के दर्द की बात करते हैं तो हमें सबसे पहले यह समझ लेना चाहिए कि पेट कोई एक अंग (organ) नहीं है. पेट के अंदर बहुत से अंग (organs) होते हैं जिन में से किसी में भी बीमारी हो उसका दर्द पेट में ही महसूस होता है.  पेट के अंदर के महत्वपूर्ण अंग निम्न हैं –

  1. लिवर (liver, जिगर)
  2. पित्त की थैली (gall bladder, पित्ताशय)
  3. खाने की नली व आमाशय (food pipe & stomach)
  4. पैंक्रियाज़ (pancreas, अग्न्याशय)
  5. छोटी व बड़ी आंत एवं मलाशय (small & large intestine and rectum)
  6. ऐपेंडिक्स (appendix)
  7. गुर्दे व गुर्दे की नलियाँ (kidneys & ureters)
  8. मूत्राशय (urinary bladder, पेशाब की थैली)
  9. पुरुष जननांग प्रोस्टेट व वृषण (male genitals, prostate & testis)
  10. स्त्री जननांग अंडाशय, नलियाँ व गर्भाशय (ovary, tubes & uterus)
  11. आँतों की झिल्ली (peritoneum & omentum)
  12. लिम्फ नोड्स (lymph nodes, लसीका ग्रंथियां)

सामान्यतः लक्षणों और जांचों के आधार पर यह जाना जा सकता है कि पेट का दर्द किस अंग में और किस बीमारी के कारण हो रहा है. पेट के अंगों की बीमारियों के अतिरिक्त कुछ अन्य बीमारियों का दर्द भी पेट में महसूस हो सकता है जैसे हार्ट अटैक,  हरपीस,  रीढ़ की हड्डी में नसों का दबना , डायबिटिक न्यूरोपैथी, पोरफायरिया (porphyria) आदि.

पेट में किस स्थान पर दर्द हो रहा है इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि पेट के किस अंग में बीमारी है. दर्द तेज है या हल्का, लगातार होता है या रुक रुक कर, हाल में शुरू हुआ है या बहुत दिन से है, लैट्रीन कैसी होती है, दस्त – उल्टी –  कब्ज़  या बुखार तो नहीं है,  उल्टी होती है तो उसका रंग कैसा है, गैस पास होती है या नहीं, उस स्थान पर दबाने से दर्द होता है या नहीं , पेशाब का रंग कैसा है, पेशाब में जलन तो नहीं होती या बार बार तो नहीं आती, पेट में दबाने से कोई गांठ या पानी तो नहीं मालूम होता, जिगर, तिल्ली, गुर्दे बढ़े हुए तो नहीं है,  हर्निया है या नहीं, यदि है तो उसमें आंत तो नहीं फंसी हुई है, महिलाओं में मासिक धर्म कैसा होता है, ल्यूकोरिया तो नहीं है, उनको गर्भ तो नहीं है, हाल में कोई प्रसव या गर्भपात तो नहीं हुआ है, आदि बहुत से लक्षणों को देख कर दर्द के कारण का अंदाज़ा अधिकतर मरीजों में लगाया जा सकता है. सामान्य खून की जांच, मल मूत्र की जांच, एक्स रे व अल्ट्रासाउंड से डायग्नोसिस में सहायता मिलती है. कभी कभी कुछ विशेष  खून की जांचें, विशेष प्रकार के एक्सरे,  एंडोस्कोपी एवं सीटी स्कैन या MRI आदि भी कराने पड़ सकते हैं.

पेट की सबसे सामान्य (common) बीमारियों के विषय में संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है –

  1. लिवर (liver) की बीमारियां : लिवर में दर्द का  सबसे सामान्य कारण है पीलिया  जो कि वायरल इन्फेक्शन,  दवाओं के रिएक्शन या शराब के अधिक सेवन के कारण होता है. (अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पीलिया).  कुछ लोगों में अमीबिक इन्फेक्शन द्वारा भी लिवर में सूजन हो सकती है और फोड़ा बन  सकता है (amebic  liver abcess). इसके इलाज के लिए दवाएं दी जाती हैं एवं कुछ मरीजों में सुई द्वारा  पस  निकालना भी पड़ता है. ह्रदय यदि ठीक से रक्त पंप न  क्या कर रहा हो (heart failure)  तो भी लिवर में सूजन और दर्द हो सकता है.  लिवर में चर्बी जमा होने से  सामान्यत: दर्द नहीं होता.  लिवर में कैंसर होने पर ही शुरु की  स्टेज में दर्द नहीं होता है.
  2.  पित्त की थैली (gall bladder) की बीमारियां :  पित्त की थैली में सूजन से पेट व पीठ में दर्द, उल्टियां एवं बुखार होता है. इसको अल्ट्रासाउंड द्वारा डायग्नोस करते हैं. अधिकतर मरीजों में यह दवाओं से ठीक हो जाती है. किसी किसी मरीज़ में ऑपरेशन करना पड़ सकता है. पित्त की थैली में पथरी से भी इसी प्रकार का दर्द हो सकता है. (पूरी जानकारी के लिए कृपया संबंधित लेख पढ़ें).
  3. खाने की नली (food pipe) में सूजन, सिकुड़न व अल्सर : खाने की नली में होने वाला दर्द आम तौर पर पेट के ऊपरी हिस्से और सीने में होता है.  यह खाना खाने से बढ़ता है,  इसके साथ सीने में जलन भी होती है और कभी कभी खून की उल्टी भी होती हैं. इसको एंडोस्कोपी द्वारा डायग्नोस किया जाता है. इसके इलाज में  तेजाब कम करने की दवाओं एवं सख्त परहेज की आवश्यकता होती है.

    खाने की नाली और आमाशय का दर्द

  4. आमाशय (stomach) में सूजन एवं अल्सर (gastritis & ulcer) :  ये बीमारियां तेजाब की अधिकता या एक विशेष  बैक्टीरिया (Helicobacter pylori) द्वारा इन्फेक्शन होने पर होती हैं.  इनका दर्द  अधिकतर पेट के ऊपरी हिस्से में होता है,  पर कभी-कभी पेट के निचले हिस्से या पीठ में भी हो सकता है.  यह दर्द खाना खाने के बाद  बढ़ता है  तथा इसके साथ पेट व सीने में जलन  एवं उल्टियां भी हो सकती है. अल्सर से ब्लीडिंग होने पर खून की उल्टियां आ सकती हैं एवं लैट्रिन काले रंग की आ सकती है. एंडोस्कोपी द्वारा गैस्ट्राइटिस व अल्सर की डायग्नोसिस की जा सकती है एवं बायोप्सी लेकर हेलिकोबैक्टर इंफेक्शन का भी  पता लगाया जा सकता है. यदि किसी मरीज में कैंसर का शक हो  तो उसको भी  बायोप्सी द्वारा डायग्नोस किया जा सकता है.  गैस्ट्राइटिस एवं अल्सर के मरीजों को तेजाब की दवाई लंबे समय तक खानी होती हैं एवं तेजाब बनाने वाली चीजों का परहेज जीवन भर करना होता है. जिन मरीजों को हेलिकोबैक्टर  का इंफेक्शन होता है उन्हें विशेष एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स भी दिया जाता है.
  5. पैंक्रियाज़  में सूजन  (pancreatitis) :   आमाशय और रीढ़ की हड्डी के बीच में पैंक्रियाज नामक  ग्रंथि होती है जिसमें पाचक रस बनते हैं.  इस में सूजन आने के तीन मुख्य कारण हैं,  शराब का अधिक सेवन, पित्त की थैली में पथरी और रक्त में चर्बी (triglycerides) का अत्यधिक बढ़ा होना.  इस में सूजन आने पर पेट के ऊपरी हिस्से में बहुत अधिक दर्द होता है जो कि पीठ में भी महसूस होता है एवं उल्टियां आती हैं. यह एक खतरनाक बीमारी है जिसका इलाज अस्पताल में रहकर, कुछ समय के लिए खाना पीना बिल्कुल बंद करके,  इंजेक्शन और  बोतलें चढ़ाकर किया जाता है.  जो लोग शराब पीते हैं उन्हें शराब पीना बिल्कुल बंद करना होता है एवं जिनकी पित्त की थैली में पथरी है उन्हें उसका ऑपरेशन कराना होता है.
  6. छोटी आंत की बीमारियां :  छोटी आंत के शुरू के हिस्से (duodenum)  में अल्सर बन सकता है  जिसका दर्द पेट के ऊपरी हिस्से में महसूस होता है. एंडोस्कोपी द्वारा इसको डायग्नोस किया जा सकता है एवम इसमें से बायोप्सी भी ली जा सकती है. इसका इलाज भी आमाशय के अल्सर (gastric ulcer) की भांति होता है.  अल्सर यदि अधिक गहरा हो  तो इससे आंत में आर पार छेद हो सकता है (perforation) जिससे  आमाशय या आंत के अंदर  मौजूद भोजन,  तेजाब व  पाचक रस पेट में फैल जाते हैं और पेट की झिल्ली (peritoneum)  में सूजन व इंफेक्शन पैदा करते हैं (peritonitis).  इससे पूरे पेट में बहुत अधिक दर्द होता है,  उल्टी आती हैं और गैस पास होना रुक जाती है. इसको एक्सरे, अल्ट्रासाउंड व खून की जांच आदि  से डायग्नोस करते हैं. यह एक खतरनाक स्थिति होती है जिसमें तुरंत ऑपरेशन करना आवश्यक होता है.छोटी आंत के अन्य हिस्सों (jejunum & ileum) में कोई बीमारी (सूजन, इन्फेक्शन, अल्सर आदि) होने से पेट के ऊपरी हिस्से या  बीच में दर्द होता है तथा साथ में उल्टी दस्त आदि हो सकते हैं. सामान्य  इन्फेक्शंस  को उपयुक्त एंटीबायोटिक व हलकी फुल्की  दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है.  आंत में  और आंत की झिल्ली  में TB का इन्फेक्शन भी हो सकता है जोकि TB की दवाएं देने से ठीक होता है. कभी-कभी आंत में अधिक सूजन होने, आंत उलझने  या आंत के अंदर कुछ फंस जाने से भोजन और गैस का आगे बढ़ना रुक जाता है.  इस तरह की रुकावट को intestinal obstruction  कहते हैं. यह एक खतरनाक कंडीशन है जिस में अक्सर ऑपरेशन करना पड़ता है. इसको भी  एक्स रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन व खून, पेशाब की जांचों से डायग्नोस करते हैं.
  7. ऐपेंडिसाइटिस के विषय में विस्तृत जानकारी सम्बंधित लेख में पढ़ें.
  8. बड़ी आंत एवं मलाशय की बीमारियाँ : बड़ी आंत में दर्द का सबसे कॉमन कारण है अमीबा नामक परजीवी द्वारा इन्फेक्शन (amebic colitis). इस में पेट में दर्द के साथ दस्त हो सकते हैं तथा लैट्रीन के साथ आंव व खून आ सकता है. इसके अतिरिक्त कुछ बैक्टीरिया भी बड़ी आंत में इन्फेक्शन कर सकते हैं जिससे पेटदर्द, दस्त व बुखार हो सकता है. आयु बढ़ने के साथ धमनियों (arteries) में चर्बी जमा होने (atherosclerosis) से आंत की ब्लड सप्लाई रुक सकती है जिससे आंत में गैंग्रीन हो कर पेट में दर्द के साथ लैट्रिन में खून आ सकता है. इसको ischemic colitis कहते हैं. कुछ विशेष बीमारियों ( जैसे ulcerative colitis आदि) में बिना इन्फेक्शन के आंतों में अल्सर बन जाते हैं. इसमें भी पेटदर्द, बुखार, खूनी पेचिश आदि हो सकते हैं. इसकी डायग्नोसिस दूरबीन द्वारा बड़ी आंत की जांच (colonscopy) से की जाती है.

कुछ लोगों को कब्ज़ के कारण आंतों में गांठें बन जाती हैं (इन्हें fecolith कहते हैं). इन गांठों को निकालने के लिए आंतें जोर लगाती हैं तो पेट में बहुत दर्द हो सकता है. गांठों के कारण आँतों में ऐंठन होने से कुछ लोगों को बार बार थोड़ी सी आंव या पतली लैट्रीन आ जाती है. वे इसे दस्त समझ कर दस्तों का इलाज करने लगते हैं जिससे परेशानी और बढ़ जाती है. बड़ी आंत में कैंसर होने पर  शुरू की स्टेज में आमतौर पर दर्द नहीं होता है पर यदि आंत में रूकावट हो या कैंसर अधिक बढ़ जाए तो दर्द हो सकता है.

गुर्दे की नली का दर्द

  1. गुर्दे व गुर्दे की नलियाँ (kidneys & ureters) :  गुर्दों में दर्द के दो सबसे मुख्य कारण हैं- इन्फेक्शन और पथरी. पथरी यदि गुर्दे में हो  तो इतना दर्द नहीं होता जितना कि यूरेटर में होने पर होता है. इसका दर्द कमर के ऊपरी हिस्से से शुरू हो कर आगे पेट के निचले हिस्से तक आता है और पेशाब की नली, अंडकोश या जांघ के अगले हिस्से तक जा सकता है. दर्द के साथ पेशाब में खून आना,  जलन होना या रुक रुक कर पेशाब आना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं.  गुर्दों में इंफेक्शन होने पर दर्द के साथ ठंड लगकर बुखार भी आ सकता है. अधिकतर मरीजों में पेशाब की जांच एवं अल्ट्रासाउंड द्वारा इसको डायग्नोस किया जा सकता है. अधिक जानकारी के लिए कृपया     गुर्दे में पथरी एवं पेशाब में इन्फेक्शन  लेख पढ़ें.
  2. मूत्राशय (urinary bladder, पेशाब की थैली) :  इसका दर्द पेट के निचले हिस्से में हो सकता है और पेशाब बार बार आना, जल

    torsion of testis, वृषण का घूम जाना

    न से आना या बिलकुल रुकना जैसे लक्षण हो सकते हैं. इसके मुख्य कारण भी पथरी और इन्फेक्शन होना ही हैं.

  3. पुरुष जननांग – प्रोस्टेट व वृषण (male genitals, prostate & testis) :   प्रोस्टेट ग्लैंड में इन्फेक्शन से पेट के निचली ओर गहराई में दर्द होता है. इस के साथ पेशाब बार बार आना, जलन से आना एवं ठंड लगकर बुखार आना जैसे लक्षण हो सकते हैं. वृषण (testis)  में इन्फेक्शन होने पर  अंडकोश (scrotum)  में दर्द व सूजन,  पेट के निचले हिस्से में दर्द  एवं ठंड लगकर बुखार आदि हो सकते हैं. किशोरावस्था में यदि कनवर (mumps)  निकलते हैं तो उसके बाद भी  वृषण (testis)  में इंफेक्शन हो सकता है.  एक खतरनाक बीमारी होती है वृषण का अपनी एक्सिस पर  घूम जाना (torsion of testis). इस में पेट के निचले हिस्से में बहुत तेज दर्द के साथ उल्टियां होती हैं.  इसका तुरंत ऑपरेशन करना आवश्यक होता है वरना उस साइड का  वृषण (testis) डेड  हो जाता है.   प्रोस्टेट एवं वृषण के  इन्फेक्शन को खून पेशाब की जांच एवं अल्ट्रासाउंड द्वारा  डायग्नोस करते हैं.
  4. स्त्री जननांग – अंडाशय, नलियाँ व गर्भाशय (ovary, tubes & uterus) :  अंडाशय (ovary) में इंफेक्शन से भी पेट में नीचे की ओर किसी एक साइड में दर्द हो सकता है.  यदि यह दाहिनी ओर हो तो इससे अपेंडिसाइटिस का धोखा होता है.  अंडवाहिनी नलियों (fallopian tubes) में इन्फेक्शन होने पर भी इसी प्रकार का दर्द होता है.  फैलोपियन ट्यूब में कभी कभी ट्यूबल प्रेगनेंसी भी हो सकती है.  भ्रूण का आकार बढ़ने के साथ  ट्यूब फट जाती है (rupture).  इस में दर्द  के साथ पेट के अंदर अत्यधिक रक्तस्राव होता है जिससे मरीज की जान को खतरा हो जाता है.  इस स्थिति में तुरंत ऑपरेशन आवश्यक होता है.  गर्भाशय के इंफेक्शन से भी पेट के निचले हिस्से एवं कमर में दर्द हो सकता है. गर्भवती महिलाओं में स्वत: गर्भपात (spontaneous abortion)   से भी पेट के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है.  स्त्री जननांग संबंधित बीमारियों की डायग्नोसिस में सबसे अधिक सहायता महिला चिकित्सकों द्वारा की जाने वाली अंदरूनी जांच से मिलती है.  इसके अतिरिक्त खून की जांच एवं अल्ट्रासाउंड इसमें सहायता करते हैं.
  5. आँतों की झिल्ली (peritoneum & omentum) :   आंतों को कवर करने वाली झिल्ली  में  इन्फेक्शन अधिकतर आंत बर्स्ट होने से होता है.  इसमें पेट में अत्यधिक दर्द होता है जो कि हिलने-डुलने या छूने से बढ़ता है तथा आंत की चाल रुक जाती है,  जिससे  गैस पास होना बंद हो जाती है एवं उल्टियां हो सकती हैं.  यह एक खतरनाक स्थिति है जिसमें तुरंत ऑपरेशन आवश्यक होता है.  इसकी डायग्नोसिस  एक्स रे,  अल्ट्रासाउंड एवं खून की जांच द्वारा की जाती है. आँतों की झिल्ली में कभी कभी टीबी का इन्फेक्शन भी होता है. इस से पेट में दर्द नहीं होता बल्कि पेट में पानी बनने लगता है. इसके साथ आँतों की लिम्फ नोड्स और स्वयं आँतों में भी टीबी का इन्फेक्शन हो सकता है. इसको अल्ट्रासाउंड, खून की जांच एवं पानी को निकाल कर उसकी जांच द्वारा डायग्नोस करते हैं.
  6. लिम्फ नोड्स (lymph nodes, लसीका ग्रंथियां) :   पेट के अंदर भिन्न-भिन्न स्थानों पर बहुत सी लिंफ नोड्स होती हैं.  इन में से किसी में इन्फेक्शन होने पर  पेट के उस हिस्से में दर्द हो सकता है.  इसकी डायग्नोसिस भी खून की जांच एवं अल्ट्रासाउंड द्वारा की जाती है.  किसी किसी केस में सीटी स्कैन की आवश्यकता भी पड़ सकती है.
  7. पेट के अंगों से अलग बीमारियां :   हार्ट अटैक का दर्द कभी-कभी पेट के ऊपरी हिस्से में महसूस हो सकता है.  एनजाइना या हार्ट अटैक के बहुत से मरीजों को लगता है कि उन्हें गैस बन रही है.  इस  भ्रान्ति के कारण  कई बार हार्टअटैक के इलाज में देर हो जाती है.

हर्पीस जोस्टर नाम की बीमारी में शरीर के किसी एक हिस्से में केवल एक साइड में छाले निकलते हैं  जिन में अत्यधिक दर्द होता है.  छाले निकलने से दो-तीन दिन पहले ही दर्द आरंभ हो जाता है.  यदि हरपीस  पेट के किसी हिस्से में निकली हो तो छाले निकलने से पहले तक  तेज दर्द के कारण  उस हिस्से में होने वाली पेट की किसी बीमारी का धोखा हो सकता है.

रीढ की हड्डी में कोई नस दबने पर भी  उसका दर्द पीछे से आगे  की ओर आता है.  यदि यह दर्द पेट पर हो तो पेट की बीमारी का धोखा होता है.  डायबिटिक न्यूरोपैथी में भी  किसी भी नस में दर्द हो सकता है.  यदि यह पेट की नस हो तो पेट की बीमारी का धोखा हो सकता है.

 

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